बीते शनिवार की सुबह मैं अमेरिका के बोस्टन में सड़क किनारे चल रहा था। वहां कुछ अच्छे कपड़ों में सजे-धजे लोग खेती के औजारों से एक छोटे प्लॉट पर काम कर रहे थे, जो कि स्थानीय नागरिक प्राधिकरण का था। मुझे लगा कि ये सभी तो प्राधिकरण के कर्मचारी नहीं हो सकते इसलिए मैंने अंदर जाकर उनकी कहानी जानी। वह खाली प्लॉट नागरिक प्राधिकरण का था और उसे स्थानीय रजिस्टर्ड एनजीओ को लीज पर दिया गया था। उस एनजीओ ने प्लॉट को 2×8 फीट के कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर, लकड़ी के बैरिकेड लगाए थे। फिर इसे स्थानीय परिवारों को लीज पर दिया गया, जिन्हें बागवानी में प्रयोग करने और खुद के लिए सब्जियां उगाना पसंद है। इसे कम्युनिटी गार्डनिंग कहते हैं। एनजीओ बागवानी के लिए खाद, सब्सिडी वाला पानी और सुरक्षा देता है। इसके लिए सालाना 20 डॉलर की मामूली लीज फीस ली जाती है। एक से तीन हफ्ते में उगने वाली सब्जियों को सदस्यों में बांटा जाता है या उसी एनजीओ द्वारा चलाई जा रही चैरिटी को दान कर दिया जाता है। कुछ गरीब जो रोजाना सब्जी नहीं खरीद सकते, वे अपनी फसल खुद रख लेते हैं। वहीं कुछ अमीर वीकेंड पर शौकिया तौर पर बागवानी करते हैं। इससे उन्हें गरीबों के लिए कुछ करने का मौका मिलता है, वहीं वे दोस्तों के साथ ऑर्गेनिक सब्जियां साझा भी कर पाते हैं। हर तीसरे शनिवार को गार्डनिंग डे होता है। इस दिन प्लॉट मालिक सुबह 9 से 11 बजे काम करते हैं और सब्जियों की सेहत और अपनी फसल के बारे में विचार साझा करते हैं। जैसे आने वाले गर्मी के मौसम के लिए ज्यादातर लोग टमाटर के पौधे लगा रहे हैं। जब 2-3 हफ्तों में पौधे थोड़े बड़े होंगे, तो वे लोग बाकी हरी सब्जियां लगाएंगे ताकि टमाटर के पौधे से हरी सब्जियों को छाया मिलती रहे। चूंकि अमेरिका में धनिया, कड़ी पत्ते, मिर्च और पुदीना मुफ़्त नहीं मिलते, इसलिए ज्यादातर लोग किचन गार्डन या ऐसे छोटे कम्युनिटी गार्डन में इन्हें उगाते हैं। दिलचस्प है कि यहां फसल की कटाई वाले दिन, बीज बेचने वाला अपना स्टॉल लगाता है। यह उसके लिए पार्ट-टाइम नौकरी है। अब सवाल यह है कि नागरिक प्राधिकरण ऐसे खुले प्लॉट खेती के लिए क्यों देते हैं? हर प्राधिकरण के पास भविष्य की ज़रूरत के लिए ऐसी जमीनें होती हैं। चूंकि अमेरिका जैसे भौगोलिक रूप से बड़े देश में ऐसे प्लॉट को अतिक्रमण या गैर-कानूनी पार्किंग से बचाना असंभव है, इसलिए प्राधिकरण स्थानीय लोगों की मदद लेते हैं। इसके लिए वे लोगों को अपने लिए या कम्युनिटी के लिए कुछ सब्जियां उगाने की अनुमति देते हैं। इसमें सब्जियां पसंद करने वालों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गरीबों और नागरिक प्राधिकरण, सभी का फायदा है। इससे प्राधिकरण को उस जमीन के रखरखाव पर कुछ खर्च नहीं करना पड़ता जो उन्होंने भावी पीढ़ी के लिए बचाकर रखी है। अलग-अलग देशों की समस्याएं एक जैसी होने पर भी समाधान अलग-अलग हो सकते हैं। क्योंकि यह इसपर निर्भर करता है कि हम उन समस्याओं का क्या हल निकालते हैं। और यह इस पर निर्भर है कि देश की आबादी, साक्षरता दर, नियम-कानून, किसी विचार की सामाजिक स्वीकार्यता और किसी समुदाय के अनुभव कैसे हैं। फंडा यह है कि दुनिया की समस्याएं एक जैसी होने के बावजूद उनकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। लेकिन जब हम अपने तरीके से उनके समाधान खोजें तो उसे साझा ज़रूर करें। यह न सोचें कि क्या समाधान दूसरी जगह भी लागू हो सकता है या नहीं। ऐसा करने पर हम नई समस्याओं का सामना ज्यादा समझदारी से कर पाएंगे।

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