उत्तर प्रदेश में दो चरणों में आम चुनाव हो चुके हैं और तीसरे चरण के लिए 7 मई को वोटिंग होगी लेकिन उससे पहले उत्तर प्रदेश में सियासी बयान बाजी का दौर जारी है। आम चुनाव प्रचार में बीजेपी 18 साल पुराने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को लेकर कांग्रेस को घेरने का काम कर ही रही है और अब बीजेपी वोट जिहाद का मुद्दा मिल गया है। जिसको लेकर भाजपा पूरी तरह से एग्रेसिव मोड में आ चुकी है और अब आम चुनाव के बचे हुए 5 चरणों में बीजेपी वोट जिहाद के जरिए विपक्ष को लामबंद करते नज़र आयेगी। अब आपको बताते हैं कि सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम खान ने क्या बयान दिया.…. दरअसल बीते सोमवार को फर्रुखाबाद मेंमारिया आलम फर्रुखाबाद में सपा की महिला बैंक की जिला उपाध्यक्ष हैं जो अपने चाचा सलमान खुर्शीद के साथ रैलियां को संबोधित करती नजर आ रही है। सोमवार को वह सलमान खुर्शीद के साथ फर्रुखाबाद में सपा प्रत्याशी नवल किशोर शाक्य के समर्थन में एक जनसभा में शामिल हुई। जहा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की भतीजी मारिया आलम खान चुनावी प्रचार के दौरान कहा कि मुसलमान के सामने मौजूदा हालात में वोट जिहाद जरूरी है अगर हम एक नहीं हुई तो समझ लेना यहां से नामोनिशान मिट जाएगा। संघी सरकार हमें मिटाने की कोशिश कर रही है। वही मारिया ने कहा कि मुझे बहुत शर्म आई जब मैं यह सुना कि कुछ मुसलमान ने यहां भाजपा सांसद मुकेश राजपूत की मीटिंग कराई मुझे लगता है कि समाज को उनका हुका पानी बंद कर देना चाहिए। अब आपको बताते हैं, कांग्रेस के नेता से वोट जिहाद के मायने… पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने बताया कि आमतौर पर हम लोग ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से परहेज करते हैं, क्योंकि इसका शाब्दिक अर्थ गलत लगा लिया जाता है। जिहाद का मतलब किसी परिस्थिति से संघर्ष करने के लिए होता है। यही उनका मंतव्य रहा होगा कि संविधान की रक्षा के लिए वोट जिहाद किया जाए। वही कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जिहाद शब्द का बहुत गलत मतलब निकाला जाता है। असलियत में कुरान में भी जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इसका मतलब संघर्ष है। इसको लव जिहाद, वोट जिहाद कहकर आतंकवाद से जोड़ दिया जाता है।जबकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है। मैं जिहाद शब्द का इस्तेमाल सही नहीं कह रहा लेकिन वह ये कहना चाहती होंगी कि सब मिलकर वोट को जोड़ें। मजहबी ध्रुवीकरण के लिए वोट जिहाद
सोमवार को मारिया आलम के द्वारा बोले गए शब्द वोट जिहाद के बाद से भाजपा पूरी तरीके से एग्रेसिव मोड में आ चुकी है मारिया आलम के इस बयान को लेकर भाजपा के नेताओं में आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिल रहा है और भाजपा के नेताओं का यह मानना है कि यह सब मजहबी ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है प्रदेश में दो चरणों में आम चुनाव हो चुके हैं जिनमें विपक्ष को हताशा हाथ लगी है यही कारण है कि अब मुस्लिम वोटरों को बरगलाने का काम किया जा रहा है। वहीं बीजेपी के प्रवक्ता बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने वोट जिहाद को लेकर कहा कि मैं अब तक लव जिहाद सुना था लैंड जिहाद सुना था लेकिन अब यह चुनाव में वोट जिहाद शब्द लेकर आए हैं यह सब मजहबी ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है और यह किस स्तर तक जाना चाहते हैं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास आज मुद्दा नहीं बचा हुआ है वह जनता के बीच असल मुद्दों को लेकर नहीं जा पा रहे हैं तो आज यह वोट जिहाद की बात कर रहे हैं और आज बीजेपी के पक्ष में जाने वाले मुसलमान का हुक्का पानी बंद करने की बात कर रहे हैं निर्वाचन आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए और जनता को भी इसका जवाब देना चाहिए। अब आपको बताते हैं कि एक्सपर्ट की क्या राय है वोट जिहाद के मामले को लेकर बीजेपी अब पूरी तरीके से एग्रेसिव मोड में आ चुकी है यही कारण है कि बीजेपी के नेता अब वोट जिहाद के मामले को एक बड़ा मुद्दा बनाकर वोटो का ध्रुवीकरण करना चाहती है। हम आपको बताते हैं कि वह कौन से तीन कारण हैं जिसको लेकर बीजेपी वोट जिहाद को इतना बड़ा मुद्दा बना रही है…. विपक्ष बीजेपी पर लगता है सांप्रदायिकता का आरोप
वहीं वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी पर विपक्ष लगातार सांप्रदायिकता का आरोप लगाती रही है जबकि वोट जिहाद की जो शब्दावली है वह घनघोर सांप्रदायिकता का प्रतीक है तो भारतीय जनता पार्टी क्यों ना इसको मुद्दा बनाएं। जो लोग खुद को सेकुलर बताते हैं वह जब सांप्रदायिक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं तो भारतीय जनता पार्टी पर वह कैसे सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हैं और शायद यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी इसको बड़ा मुद्दा बना रही है। बीजेपी करती है बहुसंख्यकों की राजनीति
वरिष्ठ पत्रकार रतीभान त्रिपाठी बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी वैसे तो कहती है सबका साथ सबका विकास लेकिन असल में वह सिर्फ बहुसंख्यकों की राजनीति करती है और भारतीय जनता पार्टी की बहुसंख्यक राजनीति में साबित किया है कि भारतीय राजनीति में 2013 से पहले यह एक विकेट था कि बिना मुस्लिम वोटरों के देश में या प्रदेश में सरकार नहीं बनाई जा सकती। भारतीय जनता पार्टी ने दो बार देश में दो बार उत्तर प्रदेश में और तीन बार असम में या साबित किया है कि बिना उनके सपोर्ट के भी देश में सरकार बन सकती है। तो जब उनके साथ बहुसंख्यक समुदाय खड़ा है तो वह फिर मुसलमान के पक्ष की बात क्यों करना चाहेंगे। क्योंकि यह बीजेपी भी जानती है कि मुस्लिम वोटर कभी भी उनकी तरफ नहीं आ सकते। वही जब कांग्रेस की सरकार कर्नाटक में बनी थी तब उन्होंने मुसलमान को आरक्षण दिया जिसमें न सिर्फ पसमांदा मुसलमान बल्कि फॉरवर्ड क्लास मुसलमान भी शामिल थे इसीलिए भारतीय जनता पार्टी इसको मुद्दा बना रही है जिससे कि देश में एक संदेश जाए और बहुसंख्यक को एकजुट करने में और विपक्ष को लामबंद करने में वह सफल हो। विपक्ष की कई पार्टियों मुस्लिम वोटरों की दावेदार
वहीं वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि अगर हम यूपी की बात करें तो निश्चित तौर पर वोटिंग परसेंटेज पिछली बार के मुकाबले गिरे हैं जिसका असर कहीं ना कहीं बीजेपी को भुगतना पड़ेगा। दो चरणों में हुए मतदान में ज्यादातर सीटें मुस्लिम बहुल हैं और मुसलमान बीजेपी को बहुत ही कम वोट देता है जो बहुत करीबी होते हैं या पार्टी से जुड़े होते हैं वही वोट देते हैं आम मुसलमान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देते हैं भले ही बीजेपी सार्वजनिक तौर पर इस बात को नहीं करती है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को यह पता है कि मुसलमान का वोट हमें नहीं मिलता है तो बीजेपी या मान कर चलती है कि मुस्लिम वोटर उनके सपोर्टर नहीं है वैसे भी यूपी में करीब 19% मुस्लिम वोटर हैं प्रदेश की 65 सीटों पर लगभग 20 से 30% मुस्लिम वोटरों की दावेदारी है लेकिन इन वोटरों पर जहां एक तरफ कांग्रेस और सपा दाव लगा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ बसपा और पीडीएम भी इसी कतार में है ऐसे में बीजेपी का मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में गिराना मुश्किल है इसीलिए इसको इतना मुद्दा बनाया जा रहा है।

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