उत्तर प्रदेश का गोरखपुर यूं तो कई चीजों के लिए जाना जाता है। लेकिन यहां का जायका भी काफी फेमस है। इसका स्वाद लेने के लिए आसपास के जिले के लोग आते हैं। यह लजीज डिश है…बुड़हु चाचा बर्फी वाले का शुद्ध खोया और बर्फी। पिछले 57 साल से यहां के लोग बुड़हु चाचा की खोया और बर्फी से मेहमानों का मुंह मीठा करवाते आ रहे हैं। दैनिक भास्कर जायका सीरीज में आज हम आपको इस स्पेशल बुड़हु चाचा के खोया बर्फी के स्वाद के बारे में बताते हैं। आखिर कैसे तैयार होती है ये खोया-बर्फी। 1967 में तिलक चौधरी ने शुरू की थी दुकान
1967 में गोरखपुर के बरगदवां चौराहे पर तिलक राम चौधरी उर्फ बुड़हु चाचा ने सिर्फ दो लीटर दूध से शुद्ध खोया और बर्फी की दुकान शुरू की। उस वक्त एक किलोग्राम खोया की कीमत महज एक रुपए हुआ करती थी। खासियत यह थी कि बुड़हु चाचा शुद्ध दूध कोयले की अंगेठी पर सबके सामने जलाकर खोया बनाते थे। वह क्वालिटी से समझौते नहीं करते। जो कुछ भी होता था, वो ग्राहकों के सामने होता था। अब बनाने को प्रोसेस को समझते हैं… एक ​रुपए किलो से शुरू होकर 600 रुपए पहुंचा रेट
सामने दूध से खोया तैयार कर ग्राहकों को बेचे जाने का सिलसिला आज करीब 60 साल बाद भी जारी है। अब बुड़हु चाचा की इस दुकान को उनकी तीसरी पीढ़ी संभाल रही है। साल 1998 में तिलक चौधरी का निधन हो गया। उनकी यह दुकान उनके बेटे राम प्यारे चौधरी संभालने लगे। साल 2022 तक बेटे ने पिता के नाम को जिंदा रखते हुए काम को और आगे बढ़ाया। लेकिन, साल 2022 में राम प्यारे चौधरी भी नहीं रहे। इस दुकान की देख रेख तिलक चौधरी के पोते और बहू आराधना चौधरी कर रही हैं। समय के साथ खोया और बर्फी का रेट तो बढ़ता चला गया। होली जैसे पर्व में खरीद पाना होता है मुश्किल
आज यहां खोया बर्फी के अलावा शुद्ध पनीर, लस्सी भी मिलती है। खोया 600 रुपए किलो बिकता है। वहीं, होली या अन्य पर्व में तो यहां खोया खरीद पाना लोगों के लिए किसी जंग को जितने के सामान होता है। पर्व और त्योहारों में इसकी जबरदस्त डिमांड होती है। 24 घंटे कारीगर शुद्ध खोया तैयार करते रहते हैं और ग्राहक लाइन में खरीदने को खड़े रहते हैं। पर्व त्योहारों में ​बढ़ती डिमांड को देख इसका रेट भी बढ़ जाता है। बुड़हु चाचा की दुकान चलाने वाली उनके पोते की पत्नी आराधना चौधरी बताती हैं, ‘हमारे यहां के खोया और बर्फी को लेकर ग्राहकों में शुद्धता का विश्वास है, उसे हम किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते। यही वजह है कि हमारे यहां दूध देने वाले ग्वाला भी दादा जी के जमाने से दूध दे रहे हैं। अगर उन्हें एक लीटर दूध का बाजार में 70 रुपए मिलता है तो हम उन्हें 80 रुपए प्रति लीटर देकर खरीदते हैं। ताकि, शुद्धता की गारंटी रहे। यहां आने वाली पब्लिक क्या कहती है… रोजाना तैयार होता है 60 से 70 किलो खोया
आराधना बताती हैं, रोजाना करीब 1000 से 1200 लीटर दूध से 60 से 70 किलो खोया तैयार किया जाता है। खोया को जमाकर बर्फी भी बनाई जाती है, साथ ही लस्सी में भी इसी खोया का इस्तेमाल किया जाता है। एक तरफ खोया तैयार होता है और दूसरी तरफ गराम गर्म खोया ग्राहक खरीदते रहते हैं। यह दुकान सुबह 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक खुली रहती है। लेकिन, अगर इतने समय में और भी अधिक खोया तैयार हो सके तो खरीदने वालों की कमी नहीं होगी। लेकिन, क्वालिटी खराब ना हो इसे देखते हुए हम लोग इतना ही खोया तैयार करते हैं, जिसमें क्वालिटी मेंटेन हो सके। अब बुड़हु चाचा के नाम की 8 से 10 दुकानें
आज बरगदवां चौराहे और इसके आसपास बुड़हु चाचा बर्फी वाले के नाम से 8 से 10 दुकानें खुल गई हैं। जो सभी उनके ही रिश्तेदार और पट्टीदार हैं। लेकिन, अराधना चौधरी बताती हैं कि तिलक चौधरी उर्फ बुड़हु चाचा की असली दुकान यही है। बाकी अगर हमारे परिवार के लोग उनके नाम पर अपना घर परिवार चला रहे हैं तो इसके लिए हम लोग कभी विरोध भी नहीं करते। पुराने सभी लोगों को पता है कि उनकी असली दुकान कहां और कौन सी है। शुद्धता से कोई समझौता नहीं करते हैं
खोया बनाने वाला कारीगर नरेंद्र बताते हैं, करीब 25 साल से बुड़हु चाचा की दुकान पर खोया और बर्फी बनाने का काम कर रहा हूं। हमारे पिता जी भी यहां कारीगर का काम करते थे। यहां की शुद्धता पर ग्राहकों का ​जो विश्वास है, उसे कायम रखना ही हमारी जिम्मेदारी है। यहां जो कुछ बनता है, ग्राहकों के सामने बनता है और बिकता है। शुद्धता में किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाता। यही वजह है कि जितनी डिमांड होती, उतना खोया हम कभी तैयार नहीं कर पाते। इसे भी पढ़ें… 200 से ज्यादा डिश के लिए मशहूर Chaap-Wale:रणवीर सिंह-क्रिस गेल को भी पसंद यहां का बन्नो चाप, केएफसी, जग्गा-डाकू, रोगन जोश सबसे स्वादिष्ट लखनऊ का चौक चौराहा। चौराहे के चारों तरफ काफी भीड़ है। तमाम तरह के खाने की सुगंध उठ रही है। कहीं से मक्खन मलाई की, तो कहीं कबाब के तवे पर पलटा मारने की आवाज आ रही है। ऐसी ही एक दुकान में हम पहुंच गए। बाहर की तरफ धुंआ उठ रहा है। अंदर बैठकर लोग बाहर बन रही डिश के स्वाद को चख रहे हैं। दुकान का नाम है ‘Chaap-Wala’। जहां पर 200 से ज्यादा सोया चाप की डिश बनती है। इस दुकान का केएफसी और बन्नो चाप काफी मशहूर है। पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें…

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