MoTN सर्वे से संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी BSP एक बार फिर 2014 वाली स्थिति की तरफ बढ़ रही है – और आगे की समझाइश ये है कि अगर अखिलेश यादव और राहुल गांधी को आपसी साथ पसंद नहीं आया तो बाद में पछताने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा.

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